हमारे देश के वैज्ञानिक हर दिन एक उचाईयों की और अग्रसर हैं और अपने देश का नाम ऊँचा करने के लिए रात-दिन मेहनत कर रहें है। आपको पता होगा कुछ दिन पहले इन्होंने हमारे देश को GPS का तोहफा दिया था जिससे हम कुछ समय बाद अपना जीपीएस यूज कर पाएँगे अब एक और अच्छी खबर आ रही है की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 22 जून को आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक मिशन के तहत रिकॉर्ड 20 उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगा। ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी-सी 34 का इस्तेमाल भारत के पृथ्वी निगरानी अंतरिक्ष यान काटरेसैट-2 समेत उपग्रहों को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड (एसएलपी) से सुबह 9 बजकर 25 मिनट पर ले जाने में किया जाएगा।

भारत का ध्रुवीय उपग्रह प्रमोयक राकेट  अपनी 36वीं उड़ान (पीएसएलवी-सी34) के द्वारा भू प्रेक्षण हेतु 727.5 कि.ग्रा. भारवाले कार्टोसैट-2 श्रंखला के  उपग्रह के साथ लगभग 560 कि.ग्रा. भार वाले 19 सहयात्री उपग्रहों को 505 कि.मी. की ध्रुवीय सूर्य तुल्यकाली कक्षा (एसएसओ) में स्थापित करेगा । पीएसएलवी- सी34 का सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) शार, श्रीहरिकोटा के दूसरे लांच पैड (एसएलपी) से प्रक्षेपण किया जाएगा। यह पीएसएलवी की ‘एक्सएल’ संरूपण में (ठोस स्ट्रैपऑन मोटरों का उपयोग करने वाली) चोदहवीं उड़ान होगी ।

कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह का उपयोग-

कार्टोसैट-2 श्रृंखला का उपग्रह पीएसएलवी-सी34 द्वारा ले जाए जाने वाला मुख्‍य उपग्रह है। यह पूर्व के कार्टोसैट-2ए, एवं 2बी के समान है। पीएसएलवी-सी34 द्वारा 505 कि.मी. की ध्रुवीय सूर्य तुल्‍काली कक्षा में इसके अंत:क्षेपण के बाद, इस उपग्रह को प्रचालनसात्‍मक संरूपण में लाया जाएगा, जिसके पश्‍चात., वह अपने पैनक्रोमेटिक एवं बहु-स्‍पेक्‍ट्रमी कैमराओं का उपयोग करते हुए नियमित सूदूर संवेदी सेवाएँ प्रदान करने लगेगा।

उपग्रह द्वारा भेजे गए प्रतिबिंब कार्टोग्राफिक उपयोग, शहरी व ग्रामीण उपयोग, तटीय भूमि उपयोग एवं विनियमन, उपयोगिता प्रबंधन जैसे, सड़क नेटवर्क मानीटरन, जल वितरण, भूमि उपयोग मानचित्रों का सृजन, परिशुद्धता अध्‍ययन, भौगोलिक एवं मानव-निर्मित को दर्शाने हेतु परिवर्तन संसूचन और अन्‍य भूमि सूचना प्रणाली (एल.आई.एस.) तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी.आई.एस.) अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी होंगे।

इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मिशन तैयारी समीक्षा (एमआरआर) समिति और लांच अधिकरण बोर्ड (एलएबी) की बैठक आने वाले दिनों में होगी और समीक्षा के बाद काउंटडाउन के लिए अनुमति दी जाएगी। अंतरिक्ष एजेंसी ने इससे पहले 2008 में एक मिशन के तहत कक्षा में 10 उपग्रह भेजे थे।
इसरो ने कहा कि पीएसएलवी-सी 34 पर ले जाए जाने वाले सभी 20 उपग्रहों का वजन तकरीबन 1288 किलोग्राम है। साथ भेजे जाने वाले उपग्रहों में अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और इंडोनेशिया के उपग्रहों के साथ-साथ भारतीय विश्वविद्यालयों के भी दो उपग्रह शामिल हैं।
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Source- IBN & ISRO.