गुजरात के विश्वविद्यालय में चल रहे एक रिसर्च में एक चौकानें वाला सच सामने आया है। गुजरात में गीर नस्ल की गायों के मूत्र में सोना पाया गया है। गोमूत्र में 388 प्रकार के रोग प्रतिरोधक तत्व भी पाए गए हैं। सोमनाथ जिले के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय बायोटेक्नॉलजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीए गोलकिया पिछले चार साल से गोमूत्र पर शोध कर रहे थे। गीर नस्ल की 300 से अधिक गायों के गोमूत्र के 400 नमूनों के अलग अलग परीक्षण के बाद डॉ. गोलकिया ने गोमूत्र में सोना घुलनशील कण के रूप में पाया है जिसे रासायनिक प्रकिरया के द्वारा ठोस द्रव्य बनाया जा सकता है। गोलकिया ने बताया कि रिसर्च में उन्हें 10 मिलिग्राम से लेकर 30 मिलिग्राम तक सोना/प्रति लीटर गोमूत्र में मिला है। उन्‍होंने कहा कि अभी तक हमने शास्‍त्रों में ही गोमूत्र में सोना मौजूद होने के बारे में पढ़ा था। चूंकि इसे साबित करने के लिए कोई साइंटिफिक एनालिसिस नहीं था, इसलिए हमने गोमूत्र पर रिसर्च करने की सोची। उन्होंने बताया कि हमने गोमूत्र के 400 सैंपल्स जांचे और उनमें सोने के तत्व मिले हैं। रिसर्चर्स ने ऊंट, भैंस, भेड़ और बकरियों के मूत्र की भी जांच की, लेकिन उनमें कोई एंटी-बॉयटिक तत्‍व नहीं मिला। गो‍लकिया के अनुसार, गीर की गायों के मूत्र में मिले 5,100 यौगिकों में से 388 में कई चिकित्‍सीय गुण मिले हैं। यूनिवर्सिटी की फूड टेस्टिंग लैबोरेट्री को नेशनल एक्रिडिशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग कैलिबरेशन लैबोरेट्रीज से मान्‍यता मिली है। हर साल यह लैब औसतन 50,000 टेस्‍ट्स करती है।