भारत सरकार ने दिल्ली मेट्रो के किरायों में बढ़ोतरी हेतु एक समिति को गठित किया जिसके प्रमुख दिल्ली उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश होंगे। समिति को तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को देनी होगी। एक सरकारी विज्ञप्ति में आज कहा गया की शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के यात्री किराये की सिफारिश के लिए किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) को अधिसूचित किया है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एम एल मेहता की अध्यक्षता वाली समिति को उसकी रिपोर्ट देने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।

मेट्रो एक्ट के नियमों के तहत हर दो साल बाद मेट्रो के किराए में संशोधन के लिए केंद्र सरकार को कमिटी का गठन करना होता है। लेकिन 2009 के बाद जब 2012 में इसका प्रस्ताव भेजा गया तो कमिटी के चीफ की नियुक्ति के प्रस्ताव ही बार-बार रिजेक्ट किए जाते रहे। इसकी वजह से किराया कमिटी नहीं बन पाई। इस बीच मेट्रो के बिजली खर्च और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी होती रही। दिल्ली मेट्रो का कहना है कि उस पर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का कर्ज भी है, जिसकी किस्तें उसने चुकाना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में इन किस्तों की राशि में और बढ़ोतरी होगी क्योंकि अब दूसरे और तीसरे फेज में लिए गए कर्ज की चुकता करने की अवधि शुरू हो जाएगी। ऐसे में अगर किरायों में बढ़ोतरी नहीं होती है तो दिल्ली मेट्रो और घाटे में जा सकती है।

इससे पहले दिल्ली मेट्रो के किराये में संसोधन 2009 में किये गये थे। आज की तारीख में सबसे सस्ती, सुविधाजनक और जल्दी गन्तब्य पर पहुँचाने वाली साधन दिल्ली मेट्रो ही है। या यूँ कहें की हमारी दिल्ली की लाइफ लाइन है।